महाभारत 15.47.7
एवं स्वेनाग्निना राजा समायुक्तो महीपतेमा शोचिथास्त्वं नृपतिं गतः स परमां गतिम्
evaṃ svenāgninā rājā samāyukto mahīpatemā śocithāstvaṃ nṛpatiṃ gataḥ sa paramāṃ gatim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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