महाभारत 16.1.2
ववुर्वाताः सनिर्घाता रूक्षाः शर्करवर्षिणःअपसव्यानि शकुना मण्डलानि प्रचक्रिरे
vavurvātāḥ sanirghātā rūkṣāḥ śarkaravarṣiṇaḥapasavyāni śakunā maṇḍalāni pracakrire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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