महाभारत 16.6.7
तास्तु दृष्ट्वैव कौरव्यो बाष्पेण पिहितोऽर्जुनःहीनाः कृष्णेन पुत्रैश्च नाशकत्सोऽभिवीक्षितुम्
tāstu dṛṣṭvaiva kauravyo bāṣpeṇa pihito'rjunaḥhīnāḥ kṛṣṇena putraiśca nāśakatso'bhivīkṣitum
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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