महाभारत 16.6.8
तां स वृष्ण्यन्धकजलां हयमीनां रथोडुपाम्वादित्ररथघोषौघां वेश्मतीर्थमहाग्रहाम्
tāṃ sa vṛṣṇyandhakajalāṃ hayamīnāṃ rathoḍupāmvāditrarathaghoṣaughāṃ veśmatīrthamahāgrahām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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