महाभारत 18.4.2
ददर्श तत्र गोविन्दं ब्राह्मेण वपुषान्वितम्तेनैव दृष्टपूर्वेण सादृश्येनोपसूचितम्
dadarśa tatra govindaṃ brāhmeṇa vapuṣānvitamtenaiva dṛṣṭapūrveṇa sādṛśyenopasūcitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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