महाभारत 18.4.6
अश्विनोस्तु तथा स्थाने दीप्यमानौ स्वतेजसानकुलं सहदेवं च ददर्श कुरुनन्दनः
aśvinostu tathā sthāne dīpyamānau svatejasānakulaṃ sahadevaṃ ca dadarśa kurunandanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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