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महाभारत 2.1.10
यां कृतां नानुकुर्युस्ते मानवाः प्रेक्ष्य विस्मिताःमनुष्यलोके कृत्स्नेऽस्मिंस्तादृशीं कुरु वै सभाम्
yāṃ kṛtāṃ nānukuryuste mānavāḥ prekṣya vismitāḥmanuṣyaloke kṛtsne'smiṃstādṛśīṃ kuru vai sabhām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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