महाभारत 2.1.5
अहं हि विश्वकर्मा वै दानवानां महाकविःसोऽहं वै त्वत्कृते किंचित्कर्तुमिच्छामि पाण्डव
ahaṃ hi viśvakarmā vai dānavānāṃ mahākaviḥso'haṃ vai tvatkṛte kiṃcitkartumicchāmi pāṇḍava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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