महाभारत 2.10.12
एताः सहस्रशश्चान्या नृत्तगीतविशारदाःउपतिष्ठन्ति धनदं पाण्डवाप्सरसां गणाः
etāḥ sahasraśaścānyā nṛttagītaviśāradāḥupatiṣṭhanti dhanadaṃ pāṇḍavāpsarasāṃ gaṇāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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