महाभारत 2.10.15
कशेरको गण्डकण्डुः प्रद्योतश्च महाबलःकुस्तुम्बुरुः पिशाचश्च गजकर्णो विशालकः
kaśerako gaṇḍakaṇḍuḥ pradyotaśca mahābalaḥkustumburuḥ piśācaśca gajakarṇo viśālakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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