महाभारत 2.10.5
तस्यां वैश्रवणो राजा विचित्राभरणाम्बरःस्त्रीसहस्रावृतः श्रीमानास्ते ज्वलितकुण्डलः
tasyāṃ vaiśravaṇo rājā vicitrābharaṇāmbaraḥstrīsahasrāvṛtaḥ śrīmānāste jvalitakuṇḍalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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