महाभारत 2.18.18
तस्मान्नयविधानज्ञं पुरुषं लोकविश्रुतम्वयमाश्रित्य गोविन्दं यतामः कार्यसिद्धये
tasmānnayavidhānajñaṃ puruṣaṃ lokaviśrutamvayamāśritya govindaṃ yatāmaḥ kāryasiddhaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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