महाभारत 2.18.19
एवं प्रज्ञानयबलं क्रियोपायसमन्वितम्पुरस्कुर्वीत कार्येषु कृष्ण कार्यार्थसिद्धये
evaṃ prajñānayabalaṃ kriyopāyasamanvitampuraskurvīta kāryeṣu kṛṣṇa kāryārthasiddhaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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