महाभारत 2.18.2
न स शक्यो रणे जेतुं सर्वैरपि सुरासुरैःप्राणयुद्धेन जेतव्यः स इत्युपलभामहे
na sa śakyo raṇe jetuṃ sarvairapi surāsuraiḥprāṇayuddhena jetavyaḥ sa ityupalabhāmahe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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