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महाभारत 2.23.10
प्रतीचीं नकुलो राजन्दिशं व्यजयदस्त्रवित्खाण्डवप्रस्थमध्यास्ते धर्मराजो युधिष्ठिरः
pratīcīṃ nakulo rājandiśaṃ vyajayadastravitkhāṇḍavaprasthamadhyāste dharmarājo yudhiṣṭhiraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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