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महाभारत 2.23.12
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
धनंजयस्य वक्ष्यामि विजयं पूर्वमेव तेयौगपद्येन पार्थैर्हि विजितेयं वसुंधरा
dhanaṃjayasya vakṣyāmi vijayaṃ pūrvameva teyaugapadyena pārthairhi vijiteyaṃ vasuṃdharā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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