महाभारत 2.23.22
अहं सखा सुरेन्द्रस्य शक्रादनवमो रणेन च शक्नोमि ते तात स्थातुं प्रमुखतो युधि
ahaṃ sakhā surendrasya śakrādanavamo raṇena ca śaknomi te tāta sthātuṃ pramukhato yudhi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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