महाभारत 2.23.23
किमीप्सितं पाण्डवेय ब्रूहि किं करवाणि तेयद्वक्ष्यसि महाबाहो तत्करिष्यामि पुत्रक
kimīpsitaṃ pāṇḍaveya brūhi kiṃ karavāṇi teyadvakṣyasi mahābāho tatkariṣyāmi putraka
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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