महाभारत 2.23.2
धनुरस्त्रं शरा वीर्यं पक्षो भूमिर्यशो बलम्प्राप्तमेतन्मया राजन्दुष्प्रापं यदभीप्सितम्
dhanurastraṃ śarā vīryaṃ pakṣo bhūmiryaśo balamprāptametanmayā rājanduṣprāpaṃ yadabhīpsitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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