महाभारत 2.23.7
इत्युक्तः प्रययौ पार्थः सैन्येन महता वृतःअग्निदत्तेन दिव्येन रथेनाद्भुतकर्मणा
ityuktaḥ prayayau pārthaḥ sainyena mahatā vṛtaḥagnidattena divyena rathenādbhutakarmaṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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