महाभारत 2.30.32
तद्वाक्यसमकालं तु कृतं सर्वमवेदयत्सहदेवो युधां श्रेष्ठो धर्मराजे महात्मनि
tadvākyasamakālaṃ tu kṛtaṃ sarvamavedayatsahadevo yudhāṃ śreṣṭho dharmarāje mahātmani
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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