महाभारत 2.30.3
सर्वारम्भाः सुप्रवृत्ता गोरक्षं कर्षणं वणिक्विशेषात्सर्वमेवैतत्संजज्ञे राजकर्मणः
sarvārambhāḥ supravṛttā gorakṣaṃ karṣaṇaṃ vaṇikviśeṣātsarvamevaitatsaṃjajñe rājakarmaṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें