महाभारत 2.30.46
आजग्मुर्ब्राह्मणास्तत्र विषयेभ्यस्ततस्ततःसर्वविद्यासु निष्णाता वेदवेदाङ्गपारगाः
ājagmurbrāhmaṇāstatra viṣayebhyastatastataḥsarvavidyāsu niṣṇātā vedavedāṅgapāragāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें