महाभारत 2.32.3
एवमुक्त्वा स तान्सर्वान्दीक्षितः पाण्डवाग्रजःयुयोज ह यथायोगमधिकारेष्वनन्तरम्
evamuktvā sa tānsarvāndīkṣitaḥ pāṇḍavāgrajaḥyuyoja ha yathāyogamadhikāreṣvanantaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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