महाभारत 2.34.14किमन्यदवमानाद्धि यदिमं राजसंसदिअप्राप्तलक्षणं कृष्णमर्घ्येणार्चितवानसिkimanyadavamānāddhi yadimaṃ rājasaṃsadiaprāptalakṣaṇaṃ kṛṣṇamarghyeṇārcitavānasiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें