महाभारत 2.35.2
नेदं युक्तं महीपाल यादृशं वै त्वमुक्तवान्अधर्मश्च परो राजन्पारुष्यं च निरर्थकम्
nedaṃ yuktaṃ mahīpāla yādṛśaṃ vai tvamuktavānadharmaśca paro rājanpāruṣyaṃ ca nirarthakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें