महाभारत 2.35.4
पश्य चेमान्महीपालांस्त्वत्तो वृद्धतमान्बहून्मृष्यन्ते चार्हणां कृष्णे तद्वत्त्वं क्षन्तुमर्हसि
paśya cemānmahīpālāṃstvatto vṛddhatamānbahūnmṛṣyante cārhaṇāṃ kṛṣṇe tadvattvaṃ kṣantumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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