महाभारत 2.36.12
पूजयित्वा तु पूजार्हं ब्रह्मक्षत्रं विशेषतःसहदेवो नृणां देवः समापयत कर्म तत्
pūjayitvā tu pūjārhaṃ brahmakṣatraṃ viśeṣataḥsahadevo nṛṇāṃ devaḥ samāpayata karma tat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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