महाभारत 2.36.13
तस्मिन्नभ्यर्चिते कृष्णे सुनीथः शत्रुकर्षणःअतिताम्रेक्षणः कोपादुवाच मनुजाधिपान्
tasminnabhyarcite kṛṣṇe sunīthaḥ śatrukarṣaṇaḥatitāmrekṣaṇaḥ kopāduvāca manujādhipān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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