महाभारत 2.36.2
केशवं केशिहन्तारमप्रमेयपराक्रमम्पूज्यमानं मया यो वः कृष्णं न सहते नृपाः
keśavaṃ keśihantāramaprameyaparākramampūjyamānaṃ mayā yo vaḥ kṛṣṇaṃ na sahate nṛpāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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