महाभारत 2.36.3
सर्वेषां बलिनां मूर्ध्नि मयेदं निहितं पदम्एवमुक्ते मया सम्यगुत्तरं प्रब्रवीतु सः
sarveṣāṃ balināṃ mūrdhni mayedaṃ nihitaṃ padamevamukte mayā samyaguttaraṃ prabravītu saḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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