महाभारत 2.36.8
तत्राहूतागताः सर्वे सुनीथप्रमुखा गणाःसंप्रादृश्यन्त संक्रुद्धा विवर्णवदनास्तथा
tatrāhūtāgatāḥ sarve sunīthapramukhā gaṇāḥsaṃprādṛśyanta saṃkruddhā vivarṇavadanāstathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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