महाभारत 2.37.3
असौ रोषात्प्रचलितो महान्नृपतिसागरःअत्र यत्प्रतिपत्तव्यं तन्मे ब्रूहि पितामह
asau roṣātpracalito mahānnṛpatisāgaraḥatra yatpratipattavyaṃ tanme brūhi pitāmaha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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