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महाभारत 2.37.6
मा भैस्त्वं कुरुशार्दूल श्वा सिंहं हन्तुमर्हतिशिवः पन्थाः सुनीतोऽत्र मया पूर्वतरं वृतः
mā bhaistvaṃ kuruśārdūla śvā siṃhaṃ hantumarhatiśivaḥ panthāḥ sunīto'tra mayā pūrvataraṃ vṛtaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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