महाभारत 2.39.13
उत्पतन्तं तु वेगेन जग्राहैनं मनस्विनम्भीष्म एव महाबाहुर्महासेनमिवेश्वरः
utpatantaṃ tu vegena jagrāhainaṃ manasvinambhīṣma eva mahābāhurmahāsenamiveśvaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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