महाभारत 2.39.15
नातिचक्राम भीष्मस्य स हि वाक्यमरिंदमःसमुद्धूतो घनापाये वेलामिव महोदधिः
nāticakrāma bhīṣmasya sa hi vākyamariṃdamaḥsamuddhūto ghanāpāye velāmiva mahodadhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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