महाभारत 2.39.17
उत्पतन्तं तु वेगेन पुनः पुनररिंदमःन स तं चिन्तयामास सिंहः क्षुद्रमृगं यथा
utpatantaṃ tu vegena punaḥ punarariṃdamaḥna sa taṃ cintayāmāsa siṃhaḥ kṣudramṛgaṃ yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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