महाभारत 2.39.18
प्रहसंश्चाब्रवीद्वाक्यं चेदिराजः प्रतापवान्भीमसेनमतिक्रुद्धं दृष्ट्वा भीमपराक्रमम्
prahasaṃścābravīdvākyaṃ cedirājaḥ pratāpavānbhīmasenamatikruddhaṃ dṛṣṭvā bhīmaparākramam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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