महाभारत 2.40.14
ततश्चेदिपुरं प्राप्तौ संकर्षणजनार्दनौयादवौ यादवीं द्रष्टुं स्वसारं तां पितुस्तदा
tataścedipuraṃ prāptau saṃkarṣaṇajanārdanauyādavau yādavīṃ draṣṭuṃ svasāraṃ tāṃ pitustadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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