महाभारत 2.40.1
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
चेदिराजकुले जातस्त्र्यक्ष एष चतुर्भुजःरासभारावसदृशं रुराव च ननाद च
cedirājakule jātastryakṣa eṣa caturbhujaḥrāsabhārāvasadṛśaṃ rurāva ca nanāda ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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