महाभारत 2.47.19
चीनान्हूणाञ्शकानोड्रान्पर्वतान्तरवासिनःवार्ष्णेयान्हारहूणांश्च कृष्णान्हैमवतांस्तथा
cīnānhūṇāñśakānoḍrānparvatāntaravāsinaḥvārṣṇeyānhārahūṇāṃśca kṛṣṇānhaimavatāṃstathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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