महाभारत 2.47.31
एतद्दत्त्वा महद्द्रव्यं पूर्वदेशाधिपो नृपःप्रविष्टो यज्ञसदनं पाण्डवस्य महात्मनः
etaddattvā mahaddravyaṃ pūrvadeśādhipo nṛpaḥpraviṣṭo yajñasadanaṃ pāṇḍavasya mahātmanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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