महाभारत 2.47.8बलिं च कृत्स्नमादाय भरुकच्छनिवासिनःउपनिन्युर्महाराज हयान्गान्धारदेशजान्baliṃ ca kṛtsnamādāya bharukacchanivāsinaḥupaninyurmahārāja hayāngāndhāradeśajānइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें