महाभारत 2.48.28यज्ञसेनेन दासीनां सहस्राणि चतुर्दशदासानामयुतं चैव सदाराणां विशां पतेyajñasenena dāsīnāṃ sahasrāṇi caturdaśadāsānāmayutaṃ caiva sadārāṇāṃ viśāṃ pateइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें