महाभारत 2.48.36अयुतं त्रीणि पद्मानि गजारोहाः ससादिनःरथानामर्बुदं चापि पादाता बहवस्तथाayutaṃ trīṇi padmāni gajārohāḥ sasādinaḥrathānāmarbudaṃ cāpi pādātā bahavastathāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें