महाभारत 2.48.4
ते वै पिपीलिकं नाम वरदत्तं पिपीलिकैःजातरूपं द्रोणमेयमहार्षुः पुञ्जशो नृपाः
te vai pipīlikaṃ nāma varadattaṃ pipīlikaiḥjātarūpaṃ droṇameyamahārṣuḥ puñjaśo nṛpāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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