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महाभारत 2.48.5
कृष्णाँल्ललामांश्चमराञ्शुक्लांश्चान्याञ्शशिप्रभान्हिमवत्पुष्पजं चैव स्वादु क्षौद्रं तथा बहु
kṛṣṇām̐llalāmāṃścamarāñśuklāṃścānyāñśaśiprabhānhimavatpuṣpajaṃ caiva svādu kṣaudraṃ tathā bahu
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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