महाभारत 2.49.14
उपागृह्णाद्यमिन्द्राय पुराकल्पे प्रजापतिःतमस्मै शङ्खमाहार्षीद्वारुणं कलशोदधिः
upāgṛhṇādyamindrāya purākalpe prajāpatiḥtamasmai śaṅkhamāhārṣīdvāruṇaṃ kalaśodadhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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