महाभारत 2.49.16
गच्छन्ति पूर्वादपरं समुद्रं चापि दक्षिणम्उत्तरं तु न गच्छन्ति विना तात पतत्रिभिः
gacchanti pūrvādaparaṃ samudraṃ cāpi dakṣiṇamuttaraṃ tu na gacchanti vinā tāta patatribhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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