महाभारत 2.49.21
नैवं शम्बरहन्ताभूद्यौवनाश्वो मनुर्न चन च राजा पृथुर्वैन्यो न चाप्यासीद्भगीरथः
naivaṃ śambarahantābhūdyauvanāśvo manurna cana ca rājā pṛthurvainyo na cāpyāsīdbhagīrathaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें